कांग्रेस की चुनावी रणनीति: असम और अन्य राज्यों में सीनियर नेताओं की भूमिका
विधानसभा चुनावों की तैयारी
भारत में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की प्रक्रिया चल रही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इन चुनावों में सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। इस महीने मतदान होगा, और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी के सीनियर नेता चुनावी रणनीति को लागू करने, सरकार की विफलताओं को उजागर करने, बागियों को मनाने और बेहतर समन्वय स्थापित करने में जुटे हैं। वहीं, पार्टी के उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर मतदाताओं से समर्थन मांग रहे हैं.
कांग्रेस के चुनाव प्रभारियों की भूमिका
चुनावों में कांग्रेस की राज्य इकाई और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है, जिसके लिए पार्टी चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति करती है। ये प्रभारियों को रणनीति बनाने और चुनाव जीतने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। इसलिए, पार्टी सीनियर नेताओं को राज्यों में भेजती है, जो रणनीति में माहिर होते हैं और संगठन को अच्छी तरह समझते हैं.
भंवर जितेंद्र सिंह की चुनौतियाँ
भंवर जितेंद्र सिंह, जो असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और चुनाव प्रभारी हैं, वर्तमान में 2026 के चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं। उन्हें संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक कलह का सामना करना पड़ा है। उनके प्रभारी बनने के बाद, भूपेन बोरा और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी छोड़ दी। हालांकि, उनके नेतृत्व में कई पूर्व बीजेपी विधायक कांग्रेस में शामिल हुए हैं.
गिरीश चोडांकर की जिम्मेदारियाँ
गिरीश राया चोडांकर को तमिलनाडु का चुनाव प्रभारी बनाया गया है। वह एक शिक्षक रह चुके हैं और कांग्रेस की युवा शाखा से राजनीति में आए हैं। चोडांकर को चुनाव जीतने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, और उन्हें डीएमके के साथ तालमेल बनाकर रणनीति बनाने की चुनौती है.
बीएम संदीप कुमार और अविनाश पांडे
बीएम संदीप कुमार को केरल का प्रभारी बनाया गया है, जबकि अविनाश पांडे उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रभारी हैं। पांडे को प्रियंका गांधी वाड्रा की जगह यह जिम्मेदारी दी गई है, और उन्हें यूपी में पार्टी को फिर से खड़ा करने की चुनौती का सामना करना है.
