केरल के अलप्पुझा जिले का चुनावी परिदृश्य: इतिहास और वर्तमान स्थिति
अलप्पुझा का भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व
केरल का अलप्पुझा जिला समुद्र के किनारे बसा हुआ है और इसे भरपूर वर्षा, नहरों, नदियों, झीलों और अन्य जलाशयों के लिए जाना जाता है। इसके नहरों के अद्भुत नेटवर्क के कारण इसे 'पूरब का वेनिस' भी कहा जाता है, जहां नावों की भरपूर आवाजाही होती है। इस जिले के पूर्व में कोट्टायम और पथनमथिट्टा जिले हैं, जबकि वेम्बनाड झील इस क्षेत्र को जल से भरपूर बनाए रखती है। उत्तर में कोच्चि शहर, जो केरल की एक प्रमुख व्यापारिक नगरी है, स्थित है।
अलप्पुझा का ऐतिहासिक संदर्भ
अलेप्पी के नाम से भी जाना जाने वाला यह शहर ब्रिटिश वायसरॉय लॉर्ड कर्जन द्वारा 'वेनिस ऑफ द ईस्ट' के नाम से संबोधित किया गया था। इसका कारण यह है कि यहां एक ओर समुद्र और दूसरी ओर बड़ी झील है, साथ ही नदियों और नहरों का जाल है। यह जिला 17 अगस्त 1957 को अस्तित्व में आया, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है। प्रसिद्ध पत्रकार टी के माधवन ने 1925 में इसी जिले से अछूत प्रथा के खिलाफ आंदोलन किया था।
चुनावों में राजनीतिक परिदृश्य
इस जिले में राजनीतिक इतिहास को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि सत्ता में आने के लिए यहां जीत आवश्यक है। पिछले दो चुनावों में लेफ्ट ने जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस इस बार जोरदार प्रयास कर रही है। धान की खेती यहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसके चलते कांग्रेस ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 35 रुपये प्रति किलो देने का वादा किया है। पिछले निकाय चुनावों में लेफ्ट की स्थिति थोड़ी कमजोर हुई है, जहां UDF ने 23 सीटें जीतीं और लेफ्ट केवल 36 सीटों पर सिमट गया।
2021 विधानसभा चुनाव का विश्लेषण
2021 के विधानसभा चुनाव में UDF को इस जिले में बुरी हार का सामना करना पड़ा, जहां उसे केवल एक सीट पर जीत मिली। इस बार कांग्रेस ने लेफ्ट के खिलाफ एक सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। पिछले चुनाव में कई सीटों पर कांटे की टक्कर हुई थी, लेकिन कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस बार, कांग्रेस ने अपने हारे हुए उम्मीदवारों के स्थान पर नए चेहरों को उतारा है।
विधानसभा सीटों का इतिहास
अरूर- यह सीट दशकों से लेफ्ट के कब्जे में है, लेकिन कांग्रेस ने 2019 के उपचुनाव में जीत हासिल की थी। 2021 में लेफ्ट ने फिर से जीत दर्ज की।
चेरतला- 1996 से 2006 तक ए के एंटनी ने यहां जीत हासिल की, लेकिन 2006 के बाद लेफ्ट का कब्जा हो गया।
अलप्पुझा- यह सीट एक समय कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल की थी, लेकिन अब लेफ्ट का गढ़ बन गई है।
अंबलाप्पुझा- यहां 1991 से लेफ्ट का कब्जा है।
कुट्टनाड- यह सीट लंबे समय से लेफ्ट के पास है।
हरिपाद- कांग्रेस के रमेश चेन्निथला यहां से लगातार जीतते आ रहे हैं।
कायमकुलम- पिछले 20 वर्षों से लेफ्ट का कब्जा है।
मावेलिक्करा- 1991 से 2011 तक कांग्रेस के पास थी, लेकिन अब लेफ्ट का कब्जा है।
चेंगानूर- पिछले 10 वर्षों से लेफ्ट यहां जीत रहा है।
जिले की स्थिति
क्षेत्रफल- 1415 वर्ग किलोमीटर
नगर पालिका- 6
ब्लॉक- 12
तालुका- 6
ग्राम पंचायत- 72
विधानसभा सीटें- 9
LDF- 8
UDF- 1
