मालदा जिला: पश्चिम बंगाल का ऐतिहासिक और राजनीतिक केंद्र
मालदा का ऐतिहासिक महत्व
गंगा नदी पश्चिम बंगाल में मालदा के मानिकचक के निकट पहली बार प्रवेश करती है। यह जिला, जो महानंदा, फुलहार और कालिंदी नदियों से घिरा हुआ है, प्राचीन समय में पश्चिम बंगाल की राजधानी रहा करता था। गौर और पांडुआ के समय में यह क्षेत्र काफी प्रसिद्ध था। वर्तमान में, इसे उत्तरी बंगाल का प्रवेश द्वार माना जाता है, क्योंकि दक्षिण बंगाल से सिलिगुड़ी आने का एक महत्वपूर्ण जंक्शन यहीं स्थित है। मालदा जिला मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर से घिरा हुआ है, और इसका प्रशासनिक मुख्यालय इंग्लिश बाजार है। इसके साथ ही, बांग्लादेश के साथ लगभग 165 किलोमीटर लंबी सीमा भी है।
आर्थिक और सामाजिक विशेषताएँ
राजनीतिक, ऐतिहासिक, और आर्थिक दृष्टि से यह जिला महत्वपूर्ण है। इसे आम रेशम और जूट की खेती के लिए जाना जाता है, और यहां के फजली आम विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। इस जिले में मुर्शिदाबाद के बाद दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी है। कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री ए.बी. गनी खान चौधरी, जिन्हें बरकत दा के नाम से जाना जाता है, इसी जिले से थे।
ब्रिटिश काल का व्यापारिक केंद्र
बंगाल सल्तनत की राजधानी कभी इसी जिले में थी, और इसके कई निशान आज भी मौजूद हैं। ब्रिटिश शासन के दौरान, यहां व्यापार और उद्योग का विकास हुआ। अंग्रेजों ने इंग्लिश बाजार नामक व्यापारिक केंद्र स्थापित किया, और महानंदा नदी के किनारे यह क्षेत्र व्यापार और परिवहन का एक प्रमुख केंद्र बन गया।
जिले की जनसंख्या और प्रशासनिक ढांचा
क्षेत्रफल: लगभग 3733 वर्ग किलोमीटर, जनसंख्या: लगभग 39.8 लाख, साक्षरता दर: लगभग 62 प्रतिशत। इस जिले में 2 लोकसभा और 12 विधानसभा सीटें हैं। प्रमुख शहरों में मालदा, इंग्लिश बाजार और चांचल शामिल हैं। मालदा जिला परिषद की वेबसाइट के अनुसार, 1813 में पूर्णिया, दिनाजपुर और राजशाही जिलों के बाहरी हिस्सों को मिलाकर यह जिला बनाया गया था। वर्तमान में, इसमें चंचल और मालदा सदर दो उप-मंडल हैं।
राजनीतिक संरचना
मालदा जिले में मालदा उत्तर और मालदा दक्षिण दो लोकसभा सीटें हैं। इसके अलावा, यहां सात विधानसभा सीटें हैं, जिनमें हबीबपुर (ST), मालदा, इंग्लिश बाजार, मणिकचक, मथाबाड़ी, सुजापुर, और बैस्नबनगर शामिल हैं।
सामाजिक संरचना
2011 की जनगणना के अनुसार, इस जिले की कुल जनसंख्या लगभग 40 लाख थी। यहां 51.27 प्रतिशत मुस्लिम और 47.99 प्रतिशत हिंदू आबादी है। इसके अलावा, 0.74 प्रतिशत अन्य धर्मों के अनुयायी भी हैं। जिले में मुख्यतः बंगाली भाषा बोली जाती है, जबकि खोट्टा, संथाली, मैथिली और हिंदी भी कुछ अल्पसंख्यक बोलते हैं।
राजनीतिक इतिहास
मालदा जिले की लोकसभा सीट पर 2009 से पहले कांग्रेस और सीपीआई (एम) का दबदबा रहा। 1980 से 2004 तक कांग्रेस ने इस सीट पर लगातार जीत हासिल की। 2009 में इसे मालदा उत्तर और मालदा दक्षिण में विभाजित किया गया। 2011 में कांग्रेस ने 12 में से 7 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी और लेफ्ट ने क्रमशः 3 और 2 सीटों पर जीत हासिल की।
2021 में राजनीतिक बदलाव
2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 12 में से 8 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि बीजेपी ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में कांग्रेस और लेफ्ट को कोई सीट नहीं मिली। 2026 के विधानसभा चुनावों में भी इस जिले में मुख्य मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच होने की संभावना है।
